राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश में एक बार फिर चयन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में उजागर हुए Rajasthan OMR Sheet Scam ने यह साफ कर दिया है कि महज़ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि परीक्षा के बाद होने वाली ओएमआर स्कैनिंग में भी भारी “खेल” चल रहा है। SOG (Special Operations Group) की ताज़ा कार्रवाई ने इस पूरे काले कारोबार की परतों को उधेड़ कर रख दिया है।
राजस्थान OMR शीट घोटाला क्या है?
राजस्थान में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों को लेकर विवाद बना हुआ था। हाल ही में जारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और पुरानी भर्ती परीक्षाओं के नतीजों में विसंगतियां पाई गईं। जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि एक संगठित Rajasthan OMR Sheet Scam है। इसमें परीक्षा खत्म होने के बाद स्कैनिंग के दौरान अभ्यर्थियों के नंबरों के साथ छेड़छाड़ की गई।
राघव लिमिटेड (Raghav Limited) का पर्दाफाश
इस पूरे घोटाले के केंद्र में ‘राघव लिमिटेड’ नाम की कंपनी का नाम सामने आया है। इस कंपनी को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा ओएमआर शीट स्कैन करने का महत्वपूर्ण ठेका दिया गया था। जांच में पाया गया कि कंपनी के पास न केवल डेटा की जिम्मेदारी थी, बल्कि इनके पास ओएमआर शीट के अंकों में बदलाव करने का पूरा एक्सेस भी था, जिसका इन्होंने गलत फायदा उठाया।
2 नंबर के हुए 225: ओएमआर स्कैनिंग का “खेल”
SOG की पूछताछ में जो सच सामने आया वह रोंगटे खड़े करने वाला है। Rajasthan OMR Sheet Scam के तहत ओएमआर स्कैनिंग के वक्त ऐसे अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाए गए जिन्होंने या तो ओएमआर खाली छोड़ी थी या जिनके वास्तविक नंबर (Raw Marks) बेहद कम थे। चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि महज 2 नंबर पाने वाले अभ्यर्थी के अंक बढ़ाकर 225 कर दिए गए ताकि उसे मेरिट लिस्ट में टॉपर बनाया जा सके।
Dainik Bhaskar या Patrika: “इस घोटाले से जुड़ी अन्य बड़ी खबरों को आप दैनिक भास्कर पर भी पढ़ सकते हैं।”
SOG की बड़ी कार्रवाई: 5 आरोपी गिरफ्तार
20 जनवरी 2026 को SOG ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 5 मुख्य आरोपियों को दबोचा है। गिरफ्तार होने वालों में राघव लिमिटेड के दो प्रमुख कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शादान खान शामिल हैं। इनके पास से डिजिटल साक्ष्य और हेराफेरी के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। इन गिरफ्तारियों ने घोटाले की कड़ियों को जोड़ना शुरू कर दिया है।
RSSB बोर्ड और कर्मचारियों की मिलीभगत
यह Rajasthan OMR Sheet Scam बिना बोर्ड के भीतर बैठे “भेदियों” की मदद के संभव नहीं था। जांच में संकेत मिले हैं कि चयन बोर्ड के कुछ कर्मचारियों की इस कंपनी के साथ साठगांठ थी। हैरानी की बात तो यह है कि जब पिछली भर्तियों में गड़बड़ी की शिकायत हुई, तो आरोपियों ने चतुराई से खुद को ही जांच कमेटी का हिस्सा बनवा लिया ताकि उनका जुर्म कभी बाहर न आ सके।
पुरानी भर्तियों पर संकट के बादल
इस खुलासे के बाद 2018 की कृषि पर्यवेक्षक और महिला पर्यवेक्षक जैसी भर्तियों पर सवालिया निशान लग गए हैं। तत्कालीन चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी अब जांच के दायरे में है। इसके साथ ही वर्तमान में चल रही चतुर्थ श्रेणी (Group D) भर्ती के अभ्यर्थी भी इस घोटाले के सामने आने के बाद डरे हुए हैं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा ही “खेल” तो नहीं हुआ।
छात्रों की मांग और आगे की राह
राजस्थान के बेरोजगार छात्र अब सड़कों पर हैं। उनकी मांग है कि Rajasthan OMR Sheet Scam की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। छात्रों का कहना है कि जब तक चयन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक ईमानदार युवाओं का भविष्य अधर में लटका रहेगा।
जहाँ एक तरफ छात्र RSSB Notification: 6300+ कॉमन अभ्यर्थियों की खबर से उत्साहित थे, वहीं अब ओएमआर शीट में हुई इस धांधली ने सबको चौंका दिया है। क्या इस घोटाले के बाद अब वाकई सबको नौकरी मिल पाएगी?
निष्कर्ष
राजस्थान ओएमआर शीट घोटाले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। राघव लिमिटेड और बोर्ड कर्मचारियों की यह मिलीभगत लाखों युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करती है और भविष्य की परीक्षाओं में इस तरह के “खेल” को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है।

